नई दिल्ली: जम्मू-कश्मीर में चार दिनों से लगातार हो रही मूसलाधार बारिश ने भारी तबाही मचा दी है। राज्य के कई जिलों में बाढ़, भूस्खलन और बादल फटने की घटनाओं से जनजीवन पूरी तरह अस्त-व्यस्त हो गया है। बादल फटने और बाढ़ की वजह से कई लोगों की मौत हो चुकी है, जबकि हजारों लोग अपने घर छोड़कर सुरक्षित जगहों पर शरण लेने को मजबूर हुए हैं।

केंद्रीय गृह मंत्रालय स्थिति पर लगातार नजर बनाए हुए है। राहत और बचाव कार्यों के लिए NDRF, SDRF, सेना और वायुसेना की टीमें सक्रिय हैं। NDRF की 18 टीमें प्रभावित इलाकों में तैनात की गई हैं, जिनमें जम्मू में 9, किश्तवाड़ और सांबा में 3-3 तथा श्रीनगर, उधमपुर और रियासी में एक-एक टीम शामिल है।
राहत सामग्री लेकर वायुसेना का C-130 ट्रांसपोर्ट विमान गाजियाबाद के हिंडन एयरफोर्स स्टेशन से जम्मू पहुंचा है। इसके साथ ही चिनूक और MI-17 V5 हेलिकॉप्टर भी जम्मू, उधमपुर, श्रीनगर और पठानकोट एयरबेस पर तैनात रहने के लिए तैयार रखे गए हैं।

जम्मू शहर में मात्र 38 घंटे में 380 मिमी से अधिक बारिश दर्ज की गई, जो पिछले कई दशकों में सबसे अधिक है। इस भारी बारिश के कारण कई पुल और सड़कें क्षतिग्रस्त हो गई हैं। ऐतिहासिक माधोपुर पुल भी खराब हो गया है, जिसके कारण वहां यातायात पूरी तरह से बंद कर दिया गया है।
मौसम विभाग ने जम्मू संभाग के साथ-साथ दक्षिण और मध्य कश्मीर के लिए 5 सितंबर तक हल्की से भारी बारिश की चेतावनी जारी की है।
